वरिष्ठ पत्रकार अजय शर्मा की कलम से
गाजियाबाद में एक तेदुंए के देखने जाने की खबर ने मीडिया में सुर्खियां बटोरी। इस खुनूखर जानवर ने जीडीए वीसी कंचन वर्मा के गार्ड को भी
घायल हो गया। और उसके बाद शहर भ्रमण पर निकल गया। उसके शहर के भ्रमण को रोकने के लिए वन विभाग की टीम शहर के चप्पे चप्पे पर तैनात हो गई है। लेकिन वह सिर्फ शहर में तैनात सीसीटी कैमरों को जिसकी फुटेज सोशल मीडिया पर अपलोड कर दी गई।
लेकिन यह तेदुंआ यानि कि लेपर्ड कुछ सवाल खडे कर रहा है। जिनके उत्तर गाजियाबाद की मांग है। यह गाजियाबाद शहर के राजनगर कालोनी कैसे पहुंचा। क्योंकि गाजियाबाद से लगे हुए ऐसे जंगल कौन से हैं जहां पर जंगली जानवर रहते हैं। पिछले एक साल में इन जंगलों में या फिर सीमावर्ती इलाकों में तेदूए जैसे जानवर देखे गए हैं।
इस जानवर के निशान सिर्फ राजनगर में ही क्यों है। सबसे बड़ी बात यह तेदूआ हिंट दिखाई नहीं पड़ रही है। उसने गार्ड पर हमला तो किया लेकिन अपने प्राकृतिक स्वाभाव के विपरीत जख्मी करके छोड़ दिया। ऐसा क्यों। कहीं यह तेदुंआ किसी का पालतू तो नहीं था। इसकी जांच पड़ताल की आवश्यकता है। क्योंकि साहब शौक बड़ी चीज है। लोग कुत्ते बिल्ली के अलावा जंगली जानवर पालने की भी इच्छा रखते हैं। लेकिन यह इच्छा इंसानी जीवन के लिए खतरा होता है इसलिए ऐसे जानवरों के साथ फोटो खिंचवाकर सोशल मल्टीमीडिया पर अपलोड कर दिए जाते हैं। इसलिए साहब ने कहा कि शौक बड़ी बात है।
ऐसे में शुद्धता के साथ तेदूए की मौजूदगी की जांच पड़ताल की आवश्यकता है। आज तक हिन्दू शहर के भ्रमण के लिए निकला है। हो सकता है कल को शेर, लोमड़ी, हाथी, टाइगर, अजगर या फिर कोबरा भी शहर भ्रमण के लिए आते हैं। अत यह जांच का विषय है, तेदूओं के रूप में जंगली जानवर शहर भ्रमण के लिए कैसे आया।
ऐसा नंदू के गाजियाबाद के शहरी क्षेत्र मेें आने वाला यह पहली घटना हो। अगस्त के महीने में भी साहिबाबाद के वैशाली में तेदुआ देखे जाने की खबर आई थी तब तक भी रेस्क्यू टीम और वन विभाग की टीम को कोई सुराग नहीं मिला था। दो महीने बाद फिर तेदुआ राजनगर कालोनी में घूमता हुआ दिखाई दिया। इस बार भी वन विभाग खाली हाथ है। इस नाकामी ने लोगों की जिदंगी को खतरे में डाल दिया है।
डीएफओ दीक्षा भंडारी के मीडिया को बताए गए आश्वासन में सिर्फ हताशा ही समझ में आती है। क्योंकि वे पिछली बार की ही तरह इस बार भी लेपर्ड के निशान नहीं मिले हैं। लेकिन उन्हें नए सिरे से सोचना होगा और जांच शुरू होनी चाहिए। लोगों की संभावनाओं के आधार पर कि वह देहरादून से किसी टक में यहां पहुंच जाएगी या फिर हरनंदी नदी के किनारे यहां तक आ गई। " काम नहीं चलेगा। यह लोगों की जिदंगी का सवाल है।
तंेदुआ का आसान शिकार बच्चे होते हैं। तंेदुआ कुत्तों का भी शिकार करना पसंद करता है। लेकिन अभी तक ऐसी कोई भी घटना सामने नहीं आई है। लेकिन दहशत के बादल गाजियाबाद, दिल्ली, नोएडा, मेरठ में छाए हुए हैं।
दो हफते पहले ही बरेली में तेंदुआ देखने के लिए मिला था जिसके बाद कुछ बच्चे बीमार पड़ गए थे। आपको याद होगा कि सन 2019 -20 में जयपुर, जबलपुर, पीलीभीत, ग्वालियर, नागपुर, हैदराबाद में भी तेदुए की खबरें थीं लेकिन ये वो क्षेत्र थे जो जंगल के करीब थे।
इसलिए अपनी जिदंगी की सुरक्षा के लिए हम सभी को खोजने के लिए रहना होगा। पुलिस और रेस्क्यू टीम के फोन नं अपने पास इमरजेंसी मोड में रखने होंगे।
प्रशासन को भी चैकन्ना और उपस्थिति मोड में रहने की आवश्यकता है। कहीं ऐसा ना हो यह तेदुआ कुद लोगों को अपना शिकार बनाने ले। पिछली बार की तरह नहीं होना चाहिए कि वह तेदुआ जो बिग फैट कैट समझ में आ रहा था और नजरअंदाज कर दिया गया था। महज उसके दो महीने बाद ही गाजियाबाद के शहरी क्षेत्र में तेदुआ घूमता हुआ दिखाई दिया। जिन्होंने जीडीए के सफाईकर्मी पर भी हमला कर दिया। इसलिए लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस लेपर्ड का पकड़ा जाना बहुत जरूरी है। अगर यह लेपर्ड आदमखोर हो गया तो बहुत सी जिदंगियों की बलि चढ़ जाएगी। मुस्तैदी के साथ उसे ढूंढा जाना अनिवार्य है और साथ ही यह लेपर्ड यहां कैसे और कहां से पहुंचा। इन सवालों के जवाब गाजियाबाद पूछने वाला है।

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