Saturday, October 5, 2013

मैं लडूंगा इंसाफ के लिए कटारा की मां की तरह


साहिबाबाद, अजय शर्मा 

साहिबाबाद के शालीमार गार्डन निवासी चिरंजीवी लाल ने अपने पुत्र की संदिग्ध मौत जिसे आत्महत्या का नाम देकर तफ्तीश की गई, उसमें  साहिबाबाद पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगया है। मृतक के पिता के मुताबिक यदि पुलिस सही ढंग से जांच करती तो परिणाम अवश्य निकलता।

 चिरंजीवी लाल ने अपनी एफआईआर में डीएवी स्कूल ब्रिज विहार और मृतक के स्थानीय जानकार व्यक्ति ओमकेश्वर त्यागी पर आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी लेकिन पुलिस ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। मृतक के पिता ने डीएवी स्कूल ब्रिज विहार पर आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल ने मेरे बच्चे को इतना प्रताडि़त किया कि उसने आत्महत्या जैसा शायद कदम उठा लिया।

इस केस के आई ओ रहे हिंडन पुल चौकी इंचार्ज दिलीप कुमार ने उस वक्त एक मुलाकात में कहा था कि पुलिस सिर्फ आरोपों की जांच करती है न कि उसका काम सामाजिक कारण ढूंढने का है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने सभी आरोपियों से जांच पड़ताल कर ली है। तो उन्होंने कहा था कि अभी नहीं।

चिरंजीवी लाल के मुताबिक घटना स्थल पर कुछ तथ्य ऐसे थे जिनकी पुलिस ने अनदेखी की। जो निम्न बिंदुवार हैं---

1 जब मेरे बच्चे को पंखे से उतारा गया तो पंखे की मोटर चल रही थी।
2 मेरे बच्चे का कद लगभग 6 फुट था और कमरे की उंचाई ज्यादा नहीं थी इसलिए उसे सिलेंडर पर चढ़कर फांसी के फंदे पर झूलने की आवश्यकता नहीं थी।
3 कमरे की बालकनी की खिड़की खुली हुई थी जिससे यह अंदेशा होता है कि वहां से कोई आ या जा सकता है। क्योंकि यह सड़क पर खुलती है जिससे कोई भी कूद कर भाग सकता है।


इस मामले पर सीओ बार्डर अरविंद यादव ने कहा है कि इस केस में कुछ नहीं पाया गया है। इसलिए इस पर एफआर लगा दी गई है। वहीं पिता ने कहा है कि मेरे पास कुछ खोने के लिए कुछ नहीं बचा है। मैं इस लड़ाई को नीतीश कटारा की मां की तरह लडूंगा और दोषियों को सजा दिलवा कर रहूंगा। 

अभी भी रहस्य है वृद्धा की हत्या


साहिबाबाद, अजय शर्मा 

साहिबाबाद के राधे श्याम पार्क में बुजुर्ग महिला (86) की हत्या की गुत्थी अभी भी उलझी हुई है। पुलिस की जांच काफी सुस्त गति से चल रही है। साहिबाबाद पुलिस की थ्योरी के मुताबिक हत्यारों ने बुजुर्ग महिला को घर के दरवाजे पर ही कवर कर लिया था और वृद्धा को ड्राइंग रुम में

सोफे पर बैठाकर तसल्ली से तेज धारदार चाकू से गला रेत कर हत्या कर दी। सब इंस्पेक्टर राजपाल के मुताबिक हत्यारे काफी क्रूर प्रवृत्ति के रहे होंगे क्योंकि उन्होंने वृद्धा के गले पर बड़ी निर्ममता के साथ 9 वार किये और साथ ही एक वार पीठ के पर और एक पेट के पास। यह हत्या लूट या प्रापर्टी विवाद में तो नहीं गई है। सब इंस्पेक्टर ने कहा कि अभी जांच चल रही है। जल्द ही खुलासा हो जाएगा।

वहीं दूसरी ओर मृतका के पुत्र दीपकमल ने हत्या करवाने का शक अपनी पत्नी पर जाहिर किया है। उसके मुताबिक सास-बहु के संबध अच्छे नहीं थे। इस वजह से भी वह मेरी मां की हत्या करवा सकती है।

मृतका की पुत्रवधु ने बताया कि उसका दीपकमल के साथ गाजियाबाद कोर्ट में तलाक का मुकदमा चल रहा है और वह पिछले 8 महीने से अपने पति से अलग रह रही है। दीपकमल (पति) ने मारपीट कर उसे और बच्चे को घर से निकाल दिया था। हर रोज उसे प्रताडि़त करना, मारपीट करना उसके पति के व्यवहार में शामिल था।

इस वारदात पर सीओ बार्डर अरविंद कुमार यादव का कहना है कि अभी जांच पूरी होने दीजिए। तभी कुछ कह पाएंगे।

Saturday, January 12, 2013

जुवेलाइन की उम्र पर फिर से हो संशोधन



वसंत विहार गैंगरेप हादसे के बाद आरोपियों को सजा देने के लिए न्यायिक प्रक्रिया तेज हो चुकी है। लेकिन इसी बीच नाबालिग आरोपी की सजा को लेकर महिला संगठनों के साथ साथ आहत लोगों ने जुवेलाइन की उम्र को फिर से संशोधित करने की आवाज उठाना शुरु कर दिया है। गौरतलब है कि नाबालिग अपराधियों की सजा की सुनवाई जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड करता है। जिसके मानदंडों के मुताबिक नाबालिग अपराधियों को जेल की सजा की बजाय बाल सुधार गृह भेजा जाता है। नियमों के मुताबिक ऐसे अपराधियों को तीन साल से अधिक सजा नहीं दी जा सकती। ऐसे अपराधियों में उनसे जुड़ी जानकारी जैसे माता-पिता का नाम, स्कूल का ब्यौरा और पहचान सार्वजनिक नहीं की जाती है। साथ ही जुवेलाइन को 18 साल का होने से पहले सुधार गृह से रिहा भी करना पड़ता है। लेकिन इस वीभत्स गैंगरेप में क्रूरतम नाबालिग आरोपी ने इस पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। अब तक बलात्कार के ऐसे सैंकड़ों मामले देश भर से खबरों की दुनिया में अखबार और न्यूज चैनल के जरिए लोगों तक पहुंचे हैं जिसे नाबालिगों ने अंजाम दिया है।


ऐसे नाबालिगों पर दिल्ली निवासी ज्योति ने अपना कड़वा अनुभव साझा किया। ज्योति ने बातचीत में बताया कि ऐसे लड़कों से उनका और उनकी दोस्तों का भी सामना हुआ है। ये महिलाओं और युवतियों को पब्लिक प्रॉपर्टी की तरह लेते हैं। बदतमीजी, अश्लील व्यवहार, ईव टीजिंग, द्विअर्थी फिकरे, पीछा करना इनकी बीमार मानसिकता है। ये कहीं भी आपको मिल सकते हैं जैसे पब्लिक प्लेस, वर्किंग प्लेस, स्कूल कॉलेज के आस-पास, मेट्रो, बस स्टॉप और सिटी बसों के अंदर भी। मतलब ये आपको कहीं भी मिल सकते हैं किसी भी रुप में। बड़े ही आश्चर्य की बात है इनकी उम्र 13 से 18 के बीच है। ये किस तरह की परवरिश और मानसिकता है। जिसने इन नाबालिगों को ऐसा बना दिया है। इन बच्चों को कानून और सजा का भी कोई डर नहीं है। जिसकी वजह से महिलाएं किसी भी उम्र के पुरुष से सुरक्षित नहीं है। हमें तो लगता हैं कि हम एक सड़े और बीमार समाज में रह रहें हैं।

मैं दूसरों के अनुभवों की क्या बात करुं जब मैंने खुद ऐसे बच्चों को इस तरह के व्यवहार में देखा है। मुझे दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जाने का मौका मिला और कमोबेश वहां भी महिलाओं के साथ नाबालिगों का ऐसा ही व्यवहार देखने के लिए मिला। जो सोचने पर मजबूर करता है कि ऐसे हालात सिर्फ दिल्ली में ही नहीं है। इसलिए परवरिश के साथ-साथ कानून में संशोधन की आवश्यकता है। ऐसे में जुवेलाइन की उम्र को संशोधित करते हुए फिर से 16 साल करने पर गंभीरता से विचार करना होगा।