Friday, March 26, 2010

पुलिस मांगे पब्लिक का भरोसा

किसी भी आपराधिक घटना के बाद पुलिस उस मामले में नसीहत देती नजर आती है। आपको ऐसा करना चाहिए था। आपको वैसा करना चाहिए था। आप लोग बहुत ही लापरवाह हैं। आप लोग ही अपराधियों को बढ़ावा देते हैं। जिसके चलते जुर्म होता है। अगर आप जैसे संभ्रात नागरिक संभल जाए ओर सतर्क रहें तो अपराध पर काबू पाया जा सकता है। ऐसे ही कुछ चिर परिचित वाक्य आपको सुनने को मिलेगे ।




नाम बिना लिए पुलिस अधिकारी के अपराध और अपराधियों पर उनके नजरिए को बता रहा हूं । कैसे उन्होंने अपनी बात रखी और एक सांध्य दैनिक अखबार ने उसे छापा । अधिकारी पुलिस विभाग में एसएसपी के पद पर तैनात हैं। उनका कहना था कि अपराध के कारण होते हैं। जहां पर आर्थिक प्रगति तेजी से होती है वहां पर अपराध भी तेजी से बढ़ते हैं। पुलिस के पास कोई जादू की छड़ी नहीं हैं कि अपराध होने से पहले ही उसे पता चल जाएं। पुलिस की कोशिश रहती है कि कानून व्यवस्था की स्थिति बेहतर रहे और बदमाश सक्रिय न होने पाए। यदि ऐसे में कहीं पर अपराध हो भी जाता है तो पुलिस कोशिश करती है अपराधियों को पकड़ने की और उनको सजा दिलाने की। कई बार अपराध लोगों के सामने होता है और लोग बोलने के लिए तैयार नहीं होते हैं। यदि वे लोग पुलिस पर भरोसा करें और उसें ठीक से जानकारी दें तो पुलिस काफी सफल हो सकती है। दिल्ली एनसीआर में काफी तादाद में लोग आते हैं, कंपनियों में नौकरी जाने या न मिलने से वे अपराध की ओर मुड़ जाते हैं। पुलिस के साथ साथ लोगों को भी अपराध के सामाजिक कारणों के बारे में सोचना होगा। आर्थिक असमानता अपराध को बढ़ावा दे रही है।



अब मुद्दा यह है कि पुलिस अपनी दलील में कहती है कि लोग उस पर भरोसा नहीं करते ओर सही जानकारी नहीं देते । यहां पर सवाल यह उठता है कि ऐसा क्यों हैं? पुलिस ने अपना भरोसा कैसे खोया ओर कैसे? लोग क्यों भरोसा नहीं करते पुलिस पर। लोग क्यों सही जानकारी देने से कतराते हैं।

आज पुलिस कहती रहती है लोग हम पर भरोस नहीं करते, हमें सही जानकारी नही देते हैं। जिसकी वजह से अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाने में दिक्कत होती है।

यह भरोसा जैसा शब्द एक बहुत ही बड़ा सवाल है पुलिस के पास, जिसका जवाब पुलिस ढूंढ रही है। लोग कैसे भरोसा करें पुलिस पर ठीक उस तरह जैसे वे डॉक्टर पर करते हैं। जब डॉक्टर कहता है पेंट उतारो और उलटे लेट जाओ। तो कितने भरोसे के साथ व्यक्ति लेट जाता है। ऐसा विश्वास पुलिस कब हासिल कर पाएगी।

पुलिस को अपने सवालों के जबाव खुद ढूंढने होंगे और कुछ सार्थक प्रयास करने होंगे। सिर्फ गाल बजाने से कुछ नहीं होगा। तो पब्लिक का भरोसा जीतने के लिए ..........................
भरोसा किसी बाजार में नहीं बिकता है जिसे खरीदा जा सके....................

यदि कानून व्यवस्था बेहतर रहे तो अपराध और अपराधी नहीं पनप पाएगें। पुलिस अपराधियों को पकड़ने की कोशिश करने की बजाए ठोस कार्रवाई और कार्यवाई करे।

समाज है तो अपराध तो होगे ही लेकिन उसी समाज को व्यवस्थित रुप से चलाने के लिए पुलिस और कानून की व्यवस्था की गई। उसमें पुलिस कहां तक सफल हो पाई है। यह पुलिस खुद सोचे। पुलिस को अपने ऊपर लगे सभी लेबल उतारने पड़ेंगे और नई ईमेज बनाने होगी।


अगर ऐसा हो पाया तो वो दिन जल्द ही आ जाऐंगे जब व्यक्ति बेझिझक पुलिस और थानों की तरफ भरोसे के साथ जा सकेगा।

Thursday, March 4, 2010

मासूम बच्चियों के साथ बलात्कार, उत्तर प्रदेश अव्वल

आज हम बात कर रहे हैं मासूम बच्चियों के साथ होने वाले बलात्कार के बारे में। जिन्हें बलात्कार का मतलब तक नहीं पता होता है। बलात्कार इन बच्चियों के लिए जीवनभर का एक भयानक दर्द और सिर्फ ऐसा दर्द लेकर आता है जिसे शब्दों में लिख पाना बहुत ही मुश्किल काम है। इस घटना को तो पीडि़त बालिका भी बयां नहीं कर सकती। यह वह घटना जो जीवन की दिशा ही बदल देती है।

इस ब्लाग में ऐसी ही बालिकाओं के बारे में लिखा गया है, जो ऐसे वहशियों की शिकार बनी हैं। किस राज्य में ऐसे कितने भेडि़ये हैं जिनका ब्यौरा निकाल पाना तो मुश्किल है लेकिन पीडि़त बालिकाओं के सरकारी आकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है। किस राज्य में कितने वहशी दरिदें हैं। इन आकड़ोंबाजी में उत्तर प्रदेश सबसे अव्वल है और यह वही प्रदेश है जहां की सीएम एक महिला मायावती, दो महिला सांसद नेहरु परिवार से संबध रखने वाली सोनिया गांधी और मेनका गांधी हैं। एक दलितों की मसीहा है तो दूसरी तरफ देश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का गौरव हासिल करने वाले नेहरु परिवार की पुत्रवधुएं हैं। उसी प्रदेश की यह हालत है।

तो आइए नजर डालते हैं इन आकड़ों के खेल पर -------------
बच्चियों से बलात्कार के मामले में वर्ष 2008 में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर रहा जहां ऐसे 900 मामले सामने आये। उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बच्चों से बलात्कार के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किये गये।

गृह मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वर्ष में बच्चों से बलात्कार के मामलों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गयी है। वर्ष 2006 में कुल 4,721, 2007 में 6,045 और 2008 में 6,363 मामले सामने आये।

पुलिस ने 2006 में इस तरह के अपराध में संलिप्त 5,489 लोगों को गिरफ्तार किया। वहीं, 2007 में 5,756 और 2008 में 6,363 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2008 में उत्तर प्रदेश में इस तरह के 900, मध्य प्रदेश में 892, महाराष्ट्र में 690, राजस्थान में 420 तथा आंध्र प्रदेश में 412 मामले सामने आये।



आंकड़े कहते हैं कि छत्तीसगढ़ में ऐसे कुल 411, दिल्ली में 301, केरल में 215, तमिलनाड़ु में 187, पश्चिम बंगाल में 129, पंजाब में 106 और त्रिपुरा में 104 मामले सामने आये। वहीं, गुजरात में 99, कर्नाटक में 97, बिहार में 91, हरियाणा में 70, हिमाचल प्रदेश में 68, उड़ीसा में 65 और गोवा में 18 मामले दर्ज हुए।



यह आकड़े इस बात के गवाह हैं कि आदमी वासना की हवस में किस कदर अंधा है। वह अपनी काम वासना को तृप्त करने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है। यह कामांध व्यक्ति उम्र नहीं देखता है। अगर उसे कुछ दिखाई देता है तो सिर्फ काम वासना को तृप्त करना। इसके लिए वह मासूम बच्चियों को निशाना बना रहें हैं। बच्चियों के साथ बलात्कार के मामलों के बारे में


आए दिन कोई न कोई खबर सुनने में आती ही रहती है। शायद ही कोई भूला हो निठारी कांड और पंधेर को। मासूमों के साथ बलात्कार काम वासना के साथ साथ बदला लेने की नियत से भी किया जाता है। जो कि उस शख्स की बीमार मानसिकता को भी दर्शाता है। मासूम बच्चियों के साथ बलात्कार के मामले में उत्तर प्रदेश के आकड़े साफ-साफ बयां कर रहे हैं कि यहां का सभ्य व्यक्ति कितना भला मानस है जो बच्चियों को अपना शिकार बनाता है और गर्व के साथ सीना चौड़ा करके चलता है।

सभ्यता का ढोल पीटने वाला मनुष्य आज भी वास्तविक रुप में जानवर ही है। जो मनुष्य होने का दावा करता है। तो दोस्तो फैसला आप ही कर लें किस तरह की स्थिति है। और हां आपको एक बात और याद दिला दे यह वही प्रदेश है जिसके लिए कभी बिग बी अमिताभ बच्चन बड़े जोर शोर के साथ प्रचार करते नजर आते थे "भईया बड़ा दम है इस प्रदेश में"
खैर दोस्तों यह एक गंभीर विषय है.........................