नाम बिना लिए पुलिस अधिकारी के अपराध और अपराधियों पर उनके नजरिए को बता रहा हूं । कैसे उन्होंने अपनी बात रखी और एक सांध्य दैनिक अखबार ने उसे छापा । अधिकारी पुलिस विभाग में एसएसपी के पद पर तैनात हैं। उनका कहना था कि अपराध के कारण होते हैं। जहां पर आर्थिक प्रगति तेजी से होती है वहां पर अपराध भी तेजी से बढ़ते हैं। पुलिस के पास कोई जादू की छड़ी नहीं हैं कि अपराध होने से पहले ही उसे पता चल जाएं। पुलिस की कोशिश रहती है कि कानून व्यवस्था की स्थिति बेहतर रहे और बदमाश सक्रिय न होने पाए। यदि ऐसे में कहीं पर अपराध हो भी जाता है तो पुलिस कोशिश करती है अपराधियों को पकड़ने की और उनको सजा दिलाने की। कई बार अपराध लोगों के सामने होता है और लोग बोलने के लिए तैयार नहीं होते हैं। यदि वे लोग पुलिस पर भरोसा करें और उसें ठीक से जानकारी दें तो पुलिस काफी सफल हो सकती है। दिल्ली एनसीआर में काफी तादाद में लोग आते हैं, कंपनियों में नौकरी जाने या न मिलने से वे अपराध की ओर मुड़ जाते हैं। पुलिस के साथ साथ लोगों को भी अपराध के सामाजिक कारणों के बारे में सोचना होगा। आर्थिक असमानता अपराध को बढ़ावा दे रही है।
अब मुद्दा यह है कि पुलिस अपनी दलील में कहती है कि लोग उस पर भरोसा नहीं करते ओर सही जानकारी नहीं देते । यहां पर सवाल यह उठता है कि ऐसा क्यों हैं? पुलिस ने अपना भरोसा कैसे खोया ओर कैसे? लोग क्यों भरोसा नहीं करते पुलिस पर। लोग क्यों सही जानकारी देने से कतराते हैं।
आज पुलिस कहती रहती है लोग हम पर भरोस नहीं करते, हमें सही जानकारी नही देते हैं। जिसकी वजह से अपराध और अपराधियों पर अंकुश लगाने में दिक्कत होती है।
यह भरोसा जैसा शब्द एक बहुत ही बड़ा सवाल है पुलिस के पास, जिसका जवाब पुलिस ढूंढ रही है। लोग कैसे भरोसा करें पुलिस पर ठीक उस तरह जैसे वे डॉक्टर पर करते हैं। जब डॉक्टर कहता है पेंट उतारो और उलटे लेट जाओ। तो कितने भरोसे के साथ व्यक्ति लेट जाता है। ऐसा विश्वास पुलिस कब हासिल कर पाएगी।
पुलिस को अपने सवालों के जबाव खुद ढूंढने होंगे और कुछ सार्थक प्रयास करने होंगे। सिर्फ गाल बजाने से कुछ नहीं होगा। तो पब्लिक का भरोसा जीतने के लिए ..........................
भरोसा किसी बाजार में नहीं बिकता है जिसे खरीदा जा सके....................यदि कानून व्यवस्था बेहतर रहे तो अपराध और अपराधी नहीं पनप पाएगें। पुलिस अपराधियों को पकड़ने की कोशिश करने की बजाए ठोस कार्रवाई और कार्यवाई करे।
समाज है तो अपराध तो होगे ही लेकिन उसी समाज को व्यवस्थित रुप से चलाने के लिए पुलिस और कानून की व्यवस्था की गई। उसमें पुलिस कहां तक सफल हो पाई है। यह पुलिस खुद सोचे। पुलिस को अपने ऊपर लगे सभी लेबल उतारने पड़ेंगे और नई ईमेज बनाने होगी।
अगर ऐसा हो पाया तो वो दिन जल्द ही आ जाऐंगे जब व्यक्ति बेझिझक पुलिस और थानों की तरफ भरोसे के साथ जा सकेगा।



