Thursday, March 4, 2010

मासूम बच्चियों के साथ बलात्कार, उत्तर प्रदेश अव्वल

आज हम बात कर रहे हैं मासूम बच्चियों के साथ होने वाले बलात्कार के बारे में। जिन्हें बलात्कार का मतलब तक नहीं पता होता है। बलात्कार इन बच्चियों के लिए जीवनभर का एक भयानक दर्द और सिर्फ ऐसा दर्द लेकर आता है जिसे शब्दों में लिख पाना बहुत ही मुश्किल काम है। इस घटना को तो पीडि़त बालिका भी बयां नहीं कर सकती। यह वह घटना जो जीवन की दिशा ही बदल देती है।

इस ब्लाग में ऐसी ही बालिकाओं के बारे में लिखा गया है, जो ऐसे वहशियों की शिकार बनी हैं। किस राज्य में ऐसे कितने भेडि़ये हैं जिनका ब्यौरा निकाल पाना तो मुश्किल है लेकिन पीडि़त बालिकाओं के सरकारी आकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है। किस राज्य में कितने वहशी दरिदें हैं। इन आकड़ोंबाजी में उत्तर प्रदेश सबसे अव्वल है और यह वही प्रदेश है जहां की सीएम एक महिला मायावती, दो महिला सांसद नेहरु परिवार से संबध रखने वाली सोनिया गांधी और मेनका गांधी हैं। एक दलितों की मसीहा है तो दूसरी तरफ देश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का गौरव हासिल करने वाले नेहरु परिवार की पुत्रवधुएं हैं। उसी प्रदेश की यह हालत है।

तो आइए नजर डालते हैं इन आकड़ों के खेल पर -------------
बच्चियों से बलात्कार के मामले में वर्ष 2008 में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर रहा जहां ऐसे 900 मामले सामने आये। उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में बच्चों से बलात्कार के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किये गये।

गृह मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वर्ष में बच्चों से बलात्कार के मामलों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गयी है। वर्ष 2006 में कुल 4,721, 2007 में 6,045 और 2008 में 6,363 मामले सामने आये।

पुलिस ने 2006 में इस तरह के अपराध में संलिप्त 5,489 लोगों को गिरफ्तार किया। वहीं, 2007 में 5,756 और 2008 में 6,363 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2008 में उत्तर प्रदेश में इस तरह के 900, मध्य प्रदेश में 892, महाराष्ट्र में 690, राजस्थान में 420 तथा आंध्र प्रदेश में 412 मामले सामने आये।



आंकड़े कहते हैं कि छत्तीसगढ़ में ऐसे कुल 411, दिल्ली में 301, केरल में 215, तमिलनाड़ु में 187, पश्चिम बंगाल में 129, पंजाब में 106 और त्रिपुरा में 104 मामले सामने आये। वहीं, गुजरात में 99, कर्नाटक में 97, बिहार में 91, हरियाणा में 70, हिमाचल प्रदेश में 68, उड़ीसा में 65 और गोवा में 18 मामले दर्ज हुए।



यह आकड़े इस बात के गवाह हैं कि आदमी वासना की हवस में किस कदर अंधा है। वह अपनी काम वासना को तृप्त करने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है। यह कामांध व्यक्ति उम्र नहीं देखता है। अगर उसे कुछ दिखाई देता है तो सिर्फ काम वासना को तृप्त करना। इसके लिए वह मासूम बच्चियों को निशाना बना रहें हैं। बच्चियों के साथ बलात्कार के मामलों के बारे में


आए दिन कोई न कोई खबर सुनने में आती ही रहती है। शायद ही कोई भूला हो निठारी कांड और पंधेर को। मासूमों के साथ बलात्कार काम वासना के साथ साथ बदला लेने की नियत से भी किया जाता है। जो कि उस शख्स की बीमार मानसिकता को भी दर्शाता है। मासूम बच्चियों के साथ बलात्कार के मामले में उत्तर प्रदेश के आकड़े साफ-साफ बयां कर रहे हैं कि यहां का सभ्य व्यक्ति कितना भला मानस है जो बच्चियों को अपना शिकार बनाता है और गर्व के साथ सीना चौड़ा करके चलता है।

सभ्यता का ढोल पीटने वाला मनुष्य आज भी वास्तविक रुप में जानवर ही है। जो मनुष्य होने का दावा करता है। तो दोस्तो फैसला आप ही कर लें किस तरह की स्थिति है। और हां आपको एक बात और याद दिला दे यह वही प्रदेश है जिसके लिए कभी बिग बी अमिताभ बच्चन बड़े जोर शोर के साथ प्रचार करते नजर आते थे "भईया बड़ा दम है इस प्रदेश में"
खैर दोस्तों यह एक गंभीर विषय है.........................

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