Monday, February 8, 2010

हर यात्री है सहमा हुआ


दिल्ली और एनसीआर आम आदमी के लिए पूरी तरह असुरक्षित है। यहां पर रहने वाला व्यक्ति हमेशा डरा डरा और सहसा सा रहता है। किसी के साथ कहीं भी सरेराह लूट और मारपीट हो जाना एक आम बात है। चोरी, हत्या, बलात्कार, डकैती यहां का दस्तूर बन चुका है। आम आदमी की जिंदगी कहीं भी सेफ नहीं है। वह बस में चलता है तो जेबकतरों से लेकर छोटे मोटे लूटेरों का शिकार होता है। ऐसे में चाकू से हथियार से मारा जाना तो जैसे उसकी किस्मत में लिखा है। ट्रेन में सफर के दौरान लूटपाट, हत्या, मारपीट और बलात्कार जैसी घटनाए काफी लंबे समय से चली आ रहीं हैं। कभी कभी तो ट्रेन में रक्षक ही भक्षक बन जाता है। दिल्ली काठगोदाम एक्सप्रेस में एक पति को अपनी पत्नि की सुरक्षा की कीमत बदमाशों से पिटकर चुकानी पड़ी।




लेकिन अभी कुछ दिनों पहले घटी लोकल ट्रेन में साहिबाबाद-गाजियाबाद के बीच लूटपाट और हत्या की घटना ने एकदम झकझोर कर रख दिया। सुरक्षा के नाम पर सिर्फ थोथेबाजी ही रह गई है। उसके बाद सिर्फ रह गई बयानबाजी और जिम्मेदारी से बचते अधिकारी। हर व्यक्ति अपना अपना पल्ला झाड़ने में लगा हुआ नजर आता है। लोकल ट्रेन में चलने वाले यात्री पहले डेली पैसेंजरों के रुप में दूधियों, स्टूडेंट जैसे यात्रियों के जुल्म के शिकार हुआ करते थे। अब वह लूटेरों के भी आसान शिकार होने लगे हैं। महिलाओं और छात्राओं की तो बात ही छोड़ दीजिए वे ट्रेन में चलने वाले मनचलों की सबसे पसंदीदा शिकार हैं। सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद ट्रेन में यात्री सुरक्षित नहीं है।

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