वसंत विहार गैंगरेप हादसे के बाद आरोपियों को सजा देने के लिए न्यायिक प्रक्रिया तेज हो चुकी है। लेकिन इसी बीच नाबालिग आरोपी की सजा को लेकर महिला संगठनों के साथ साथ आहत लोगों ने जुवेलाइन की उम्र को फिर से संशोधित करने की आवाज उठाना शुरु कर दिया है। गौरतलब है कि नाबालिग अपराधियों की सजा की सुनवाई जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड करता है। जिसके मानदंडों के मुताबिक नाबालिग अपराधियों को जेल की सजा की बजाय बाल सुधार गृह भेजा जाता है। नियमों के मुताबिक ऐसे अपराधियों को तीन साल से अधिक सजा नहीं दी जा सकती। ऐसे अपराधियों में उनसे जुड़ी जानकारी जैसे माता-पिता का नाम, स्कूल का ब्यौरा और पहचान सार्वजनिक नहीं की जाती है। साथ ही जुवेलाइन को 18 साल का होने से पहले सुधार गृह से रिहा भी करना पड़ता है। लेकिन इस वीभत्स गैंगरेप में क्रूरतम नाबालिग आरोपी ने इस पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। अब तक बलात्कार के ऐसे सैंकड़ों मामले देश भर से खबरों की दुनिया में अखबार और न्यूज चैनल के जरिए लोगों तक पहुंचे हैं जिसे नाबालिगों ने अंजाम दिया है।
ऐसे नाबालिगों पर दिल्ली निवासी ज्योति ने अपना कड़वा अनुभव साझा किया। ज्योति ने बातचीत में बताया कि ऐसे लड़कों से उनका और उनकी दोस्तों का भी सामना हुआ है। ये महिलाओं और युवतियों को पब्लिक प्रॉपर्टी की तरह लेते हैं। बदतमीजी, अश्लील व्यवहार, ईव टीजिंग, द्विअर्थी फिकरे, पीछा करना इनकी बीमार मानसिकता है। ये कहीं भी आपको मिल सकते हैं जैसे पब्लिक प्लेस, वर्किंग प्लेस, स्कूल कॉलेज के आस-पास, मेट्रो, बस स्टॉप और सिटी बसों के अंदर भी। मतलब ये आपको कहीं भी मिल सकते हैं किसी भी रुप में। बड़े ही आश्चर्य की बात है इनकी उम्र 13 से 18 के बीच है। ये किस तरह की परवरिश और मानसिकता है। जिसने इन नाबालिगों को ऐसा बना दिया है। इन बच्चों को कानून और सजा का भी कोई डर नहीं है। जिसकी वजह से महिलाएं किसी भी उम्र के पुरुष से सुरक्षित नहीं है। हमें तो लगता हैं कि हम एक सड़े और बीमार समाज में रह रहें हैं।
मैं दूसरों के अनुभवों की क्या बात करुं जब मैंने खुद ऐसे बच्चों को इस तरह के व्यवहार में देखा है। मुझे दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जाने का मौका मिला और कमोबेश वहां भी महिलाओं के साथ नाबालिगों का ऐसा ही व्यवहार देखने के लिए मिला। जो सोचने पर मजबूर करता है कि ऐसे हालात सिर्फ दिल्ली में ही नहीं है। इसलिए परवरिश के साथ-साथ कानून में संशोधन की आवश्यकता है। ऐसे में जुवेलाइन की उम्र को संशोधित करते हुए फिर से 16 साल करने पर गंभीरता से विचार करना होगा।

