अजय शर्मा
वरिष्ठ पत्रकार
अभी कुछ दिन पहले गाजियाबाद के एक लोकल यू टयूब चैनल का वीडियो मुझे देखने के लिए मिला। जिसमें किसी सार्वजनिक शौचालय की बाहरी दीवारों पर भगवान महादेव की तस्वीर की वाॅल पेटिंग की गई है। जिसको लेकर कुछ हिन्दुवादी संगठनों ने अपना विरोध प्रदर्शन भी किया।
लेकिन इसने मुझे फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया कि भारत में क्यों हिन्दू देवी देवताओं का अपमान किया जा रहा है। क्यों सनातन धर्म संस्कृति पर चोट पहुंचाई जा रही है। क्या यह पूर्व सुनियोजित है। क्या इस साजिश में बाॅलीवुड का एक गैंग भी सक्रिय है जो बहुत ही मक्कारी भरी धर्म निरपेक्षता का दिखावा करने वाले कलाकारों से भरा हुआ है। इसी वजह से आए दिन हिंदू देवीताओं पर अभद्र टिप्पणियां की जाती हैं। अभी नवरात्रों के दौरान भी सलमान खान और रणवीर सिंह ने अभद्र टिप्पणी की थी। स्वरा भास्कर भी किसी से कम नहीं है। बाॅलीवुड का सनातन धर्म विरोधी गैंग पूरी तरह से सक्रिय है। अभी हाल ही में नेटफिल्क्स पर रीलीज हुई वेब सीरीज ए सूयटेबल बाॅय में हिन्दू धर्म का अपमान किया गया। ऐसे ढेरों उदाहरण हैं जिसमें हिन्दू धर्म को सबसे ज्यादा गलत दिखाया जाता है। ऐसी फिल्मों की भरमार है।
आपको याद होगा कि पिछले साल जनवरी 2019 में प्रयागराज कुंभ में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का दुर्गा के अवतार वाला विवादित पोस्टर लगाया गया था। इस पोस्टर में लिखा गया था- कांग्रेस की दुर्गा प्रियंका करेंगी शत्रुओं का वध। इससे पहले पटना में कांग्रेस नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को राम का अवतार दिखाते हुए पोस्टर लगाए थे। अमेठी में भी राहुल गांधी को राम दिखाते हुए पोस्टर लगाए जा चुके हैं। जाने अंनजाने में इसके जरिए हिंदू देवी-देवताओं का मजाक बनाया गया।
कांग्रेस के बड़े नेता और राहुल गांधी के करीबी शशि थरूर ने भी प्रयागराज कुंभ को लेकर हिंदू धर्म का मजाक उड़ाया था। दिल्ली में संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित ‘एक शाम बाबरी मस्जिद के नाम’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने भगवान राम, अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि स्थल सभी को कठघरे में खड़ा कर दिया था। जिसके बाद उन्हें कड़ी आलोचना का शिकार होना पड़ा था।
सेक्युलर देश में हिन्दुओं की आस्थाओं को निशाना बनाने के लिए इतना उतावलापन क्यों है? इस धर्म निरपेक्ष देश में हर दूसरे मुद्दे पर अक्सर हिन्दू आस्थाओं का अपमान करना क्यों इतना आसान है? कभी हिन्दुओं के त्योहारों का मजाक बनाया जाता है तो कभी त्रिशूल जैसे प्रतीकों का उपहास बनाया जाता है। समाज को तोड़ने के लिए इस तरह के प्रपंच गढ़ने वाले लोग कौन हैं और उन्हें किसने शरण प्रदान की है? यह जांच का विषय है।
इस तस्वीर में किसी कुत्सित मस्तिष्क के रचनाकार ने भारत देश के संविधान का दुरूपयोग करते हुए हिन्दू देवीताओं का अपमान किया है। निश्चित रूप से यह वाॅल पेंटिग घृणित, उन्मादी मानसिकता की उपज से ज्यादा और कुछ भी नहीं है। क्या धार्मिक प्रतीकों द्वारा अपनी कुंठा की अभिव्यक्ति करने वाले जानते हैं कि भविष्य में समाज को धर्म से ही नैतिकता सीखनी होगी?
मनुस्मृति जलाकर और हिन्दू आस्थाओं को ठेस पहुँचाकर अल्पकालिक रोष व्यक्त करने वाले अक्सर भूल जाते हैं कि वह कोई बड़ा परिवर्तन नहीं ला रहे हैं बल्कि इस अंतराल को और बढ़ा रहे हैं।
मेरे विचार से यदि किसी भी संगठन अथवा संस्था का दर्शन जानना है, तब उस संस्था और संगठन के अंतर्गत जो क्रांतियाँ आई हैं, उनका आवश्यक रूप से अध्ययन किया जाए। क्रांति दर्शन की जननी है, चाहे उसे दर्शन की जननी न भी माना जाए, फिर भी वह ऐसा दीप है, जो दर्शन को प्रकाशयुक्त बनाता है। धर्म भी इस नियम का अपवाद नहीं हो सकता। इसलिए मेरी दृष्टि से सबसे अच्छा तरीका यही है कि यदि हम किसी धर्म के दर्शन का मूल्यांकन करना चाहते हैं और इसके लिए कोई कसौटी निश्चित करना चाहते हैं, तब उस धर्म में जो क्रांतियाँ आई हैं, उनका अध्ययन करें। यही एक तरीका है। ना कि उसका तिरस्कार करके।
अपने देश में धर्म निरपेक्षता और विचारों की अभिव्यक्ति के अधिकार को कुत्सित हथियार बनाकर कुछ संगठन सनातन धर्म संस्कृति या फिर मनुवादी संस्कृति के खिलाफ जहरीला विरोध करते दिखाई दे जाते हैं।
अब गाजियाबाद में शौचालय की दीवार पर भगवान महादेव की तस्वीर की वाॅल पेंटिग यह बताने के लिए काफी हिन्दू देवी देवताओं का अपमान सुनियोजित ढंग से किया जा रहा है। इसकी बहुत गहन जांच पड़ताल की आवश्यकता है। गाजियाबाद के सांसद जनरल वीके सिंह, विधायक अतुल गर्ग और मेयर आशा शर्मा जी इसकी गंभीरता को समझते हुए जांच करवाएं। जिससे गाजियाबाद के लोगों के बीच एक सार्थक संदेश जाए। गाजियाबाद पूछ रहा है हिन्दू देवीताओं के अपमान पर अभी तक कारवाई क्यों नहीं हुई।
