नोएडा के निठारी कांड की यादें एक बार फिर से ताजा हो गई हैं। मोनिंदर पंढेर को मिली राहत ने पीडि़त परिवारों के जख्मों को हरा कर दिया है। आज दो साल,आठ महीने और 6 दिन बीत चुके हैं इस शर्मनाक हत्याओं के 19 मामलों के भंडाफोड़ हुए। लेकिन फैसला महज एक ही मामले का आया है। यह है अपना सिस्टम। क्या कहें इस पर। जिन मामलों की गवाह हजारों आंखें हैं। उसमें भी अपराधी यदि कथित सबूतों के अभाव में बरी होता हैं। तो इसके लिए जिम्मेदार किसे माना जाए। 17 मामलों में सीबीआई से क्लीन चिट पाने वाले पंढेर के खिलाफ भी सबूत काफी हैं। लेकिन उसे राहत मिलना सिस्टम पर सवालिया निशान लगा रहा है।
29 दिसंबर 2006 के दिन निठारी मामला जनता और प्रशासन के सामने उजागर हुआ था। जिसने सुना उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। निठारी में जिसने भी अपने बच्चे खोए हैं उनके दर्द को समझ पाना मुश्किल है। ये बच्चे मोनिंदर पंढेर की कोठी डी-5 में हवस के शिकार होने के बाद कत्ल कर दिए गए थे। पंढेर को उसके नौकर सुरेंन्द्र कोली के साथ गिरफ्तार किया गया। इसी पंढेर को दो साल सात महीने 13 दिन बाद 13 सितंबर को एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिल गई। पीडि़तों का आक्रोश फिर से उफन पड़ा है। मोनिंदर को मिली राहत ने पीडि़तों अंदर तक झकझोर कर रख दिया है। उन्हें लगता है यह भ्रष्ट सिस्टम धीरे-धीरे इस केस को कमजोर कर देगा। यहां हर कोई बिका हुआ है। इस जनता को लगता है कि इन सभी अपराधों का ठीकरा सुरेंद्र कोली के सिर पर मढ़ दिया जाएगा और पंढेर बरी कर दिया जाएगा। कोली को सजा-ए-मौत जैसी कोई सजा सुना दी जाएगी और असली गुनेहगार छूट जाएगा। इसका दर्द और बेचारगी अब इन के चेहरे पर नजर आने लगी है। इसकी छटपटाहट और आक्रोश नजर आना शुरु हो चुका है। ये पीडि़त शांत ज्वाला मुखी के समान बने हुए हैं
जो कभी भी लावा उगल सकता है। यदि ऐसा हुआ तो उस वक्त की स्थिति बहुत ही भयावह होगी। उसके बाद मीडिया में और बुद्धिजीवी वर्ग के पास बहस करने के लिए एक नया मुद्दा होगा। अगर कुछ होगा तो सिर्फ बहस और बहस...............नतीजा शून्य । हम सिर्फ यही कर सकते हैं। लेकिन फिर भी हम आशावादी बनने की कोशिश करेंगे और इतंजार करेंगे शायद कुछ सही
और सार्थक नतीजा निकल आए।
आइए डालते हैं एक नजर पूरे घटनाक्रम पर
29 दिसंबर 2006 को सीओ दिनेश यादव ने मोनिंदर पंढेर व सुरेंन्द्र कोली को गिरफ्तार किया और पंढेर की कोठी से हडि्डयां, खोपडि़यां
और हथियार बरामद किए।
10-01-07 को मामला नोएडा पुलिस से सीबीआई को ट्रांसफर किया गया।
25-01-07 को दोनों आरोपियों को गाजियाबाद कचहरी में पेशी के दौरान लोगों ने पीटा।
1-3-07 को दिल्ली अदालत में सुरेन्द्र कोली के इकबालिया बयान दर्ज कराए गए।
16-07-07 कोर्ट ने पंढेर को रिंपा हल्दर मर्डर केस में भी अनिल हल्दर के बयान के आधार पर आरोपी माना।
16-08-07 को नंदलाल के बयान के आधार पर सीओ दिनेश यादव को सीबीआई कोर्ट ने भ्रष्टाचार अधिनियम में आरोपी माना।
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5 comments:
jagarookta abhiyan ke liye badhayee.
swaagat hai.
ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है....!
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शुभेच्छु
प्रबल प्रताप सिंह
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रुचि आपका धन्यवाद
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